देश में दिव्यांग नागरिकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके जीवन को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अक्टूबर 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद दिव्यांग पेंशन योजना को नए स्वरूप में प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के नाम से आगे बढ़ाया गया है। इस बदलाव से अब पहले की तुलना में अधिक दिव्यांग नागरिकों को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता खुल गया है।
इस योजना में सबसे बड़ा बदलाव दिव्यांगता की निर्धारित सीमा और न्यूनतम आयु को लेकर किया गया है। पहले जहां पेंशन प्राप्त करने के लिए 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता और कम से कम 18 वर्ष की आयु जरूरी थी, वहीं अब पात्रता का आधार 40 प्रतिशत प्रमाणित दिव्यांगता कर दिया गया है। साथ ही बच्चों को भी इस योजना के दायरे में लाने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने केंद्रीय सहायता की राशि में भी बढ़ोतरी की है। अब 79 वर्ष तक के पात्र लाभार्थियों को ₹375 और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र वालों को ₹625 प्रतिमाह केंद्रीय सहायता देने का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना 2026: मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना |
| पुराना नाम | इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना |
| संबंधित कार्यक्रम | प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना |
| संबंधित विभाग | ग्रामीण विकास मंत्रालय |
| पात्र दिव्यांगता | न्यूनतम 40 प्रतिशत |
| न्यूनतम आयु | जन्म से पात्रता |
| 0 से 79 वर्ष तक सहायता | ₹375 प्रतिमाह |
| 80 वर्ष से अधिक आयु | ₹625 प्रतिमाह |
| भुगतान का तरीका | सीधे बैंक खाते में |
| आवेदन का माध्यम | राज्य के निर्धारित पोर्टल और कार्यालय |
दिव्यांग पेंशन योजना में क्या बदलाव किए गए हैं?
केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत नए प्रावधानों का उद्देश्य उन लोगों को भी आर्थिक सहायता के दायरे में लाना है, जो पुराने नियमों के कारण योजना का लाभ नहीं ले पाते थे।
1. अब 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर मिलेगी पात्रता
पहले इस केंद्रीय पेंशन व्यवस्था में गंभीर या बहु-दिव्यांगता की 80 प्रतिशत सीमा लागू थी। अब इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका मतलब है कि निर्धारित प्रमाणन प्रक्रिया के अनुसार 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्ति भी योजना के लिए विचार किए जा सकेंगे।
2. बच्चों को भी मिलेगा योजना का लाभ
पुरानी व्यवस्था में न्यूनतम 18 वर्ष की आयु पूरी करना जरूरी था। नए फैसले में यह शर्त हटा दी गई है। अब जन्म से दिव्यांगता वाले बच्चों को भी निर्धारित पात्रता और पारिवारिक आर्थिक शर्तें पूरी होने पर सहायता मिल सकेगी। इससे ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें बच्चों की देखभाल और उपचार पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
3. मासिक सहायता राशि में बढ़ोतरी
सरकार ने केंद्रीय पेंशन सहायता में 25 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है।
- 0 से 79 वर्ष तक: ₹300 से बढ़ाकर ₹375 प्रतिमाह।
- 80 वर्ष और उससे अधिक: ₹500 से बढ़ाकर ₹625 प्रतिमाह।
ध्यान रखें कि यह केंद्र सरकार का निर्धारित हिस्सा है। राज्य सरकार अपनी ओर से अतिरिक्त पेंशन दे सकती है। इसलिए अलग-अलग राज्यों में मिलने वाली कुल राशि एक जैसी होना जरूरी नहीं है।
योजना के अंतर्गत मिलने वाले प्रमुख लाभ
इस योजना का उद्देश्य दिव्यांग नागरिकों को नियमित आर्थिक सहारा देना है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- पात्र लाभार्थियों को हर महीने आर्थिक सहायता।
- दिव्यांग बच्चों को भी पेंशन व्यवस्था में शामिल करने का प्रावधान।
- दैनिक जरूरतों और जरूरी खर्चों में आर्थिक मदद।
- बैंक खाते में सीधे भुगतान की व्यवस्था।
- दिव्यांग नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
- राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता मिलने पर कुल पेंशन में बढ़ोतरी की संभावना।
प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना की पात्रता
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें निर्धारित की गई हैं।
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
- प्रमाणित दिव्यांगता कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए।
- दिव्यांगता का प्रमाण सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए।
- बच्चों के मामले में माता-पिता या कानूनी अभिभावक आवेदन संबंधी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
- परिवार को निर्धारित गरीबी रेखा संबंधी आर्थिक मानदंडों के अंतर्गत आना होगा।
- अन्य सरकारी पेंशन प्राप्त करने की स्थिति में संबंधित योजना के दोहरे लाभ संबंधी नियमों की जांच जरूरी है।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि केवल 40 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणपत्र होने से पेंशन अपने आप स्वीकृत नहीं होती। आर्थिक स्थिति और अन्य निर्धारित शर्तों का सत्यापन भी किया जाएगा।
आवेदन करने के लिए जरूरी दस्तावेज
पेंशन के लिए आवेदन करने से पहले निम्न दस्तावेज तैयार रखें:
- आवेदक का आधार कार्ड।
- दिव्यांगता प्रमाणपत्र या विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र।
- बैंक या डाकघर खाते की पासबुक।
- गरीबी रेखा का राशन कार्ड अथवा आय संबंधी प्रमाण।
- निवास प्रमाण पत्र।
- हाल की पासपोर्ट आकार की फोटो।
- चालू मोबाइल नंबर।
- नाबालिग आवेदक के मामले में जन्म प्रमाण पत्र और अभिभावक के दस्तावेज।
बैंक खाते में आधार और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की सुविधा सक्रिय होना भी जरूरी हो सकता है।
दिव्यांगजन पेंशन योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
आवेदन की प्रक्रिया संबंधित राज्य के समाज कल्याण विभाग द्वारा निर्धारित माध्यम से पूरी की जाती है।
- चरण 1: सबसे पहले राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट nsap.nic.in पर जाएं।
- चरण 2: अपने राज्य के पेंशन या सामाजिक कल्याण विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आवेदन संबंधी जानकारी देखें।
- चरण 3: दिव्यांग पेंशन के आवेदन विकल्प पर जाकर पंजीकरण की उपलब्धता जांचें।
- चरण 4: आवेदन पत्र में नाम, पता, जन्मतिथि, दिव्यांगता का प्रतिशत और बैंक खाते की जानकारी भरें।
- चरण 5: आधार कार्ड, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक और अन्य जरूरी कागजात जमा करें।
- चरण 6: सभी जानकारियों की जांच करके आवेदन जमा करें और प्राप्त आवेदन संख्या सुरक्षित रखें।
यदि नए नियमों के लिए आपके राज्य में अलग आवेदन व्यवस्था अभी शुरू नहीं हुई है, तो संबंधित कार्यालय से दिशा-निर्देश प्राप्त करें।
ऑफलाइन आवेदन कैसे करें?
ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर आवेदक अपने क्षेत्र के ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, नगर निकाय या जिला समाज कल्याण कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहां से निर्धारित आवेदन पत्र प्राप्त करके सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें और संबंधित अधिकारी के पास जमा कर दें। आवेदन जमा करते समय रसीद अवश्य लें, ताकि भविष्य में आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त करने में परेशानी न हो।
महत्वपूर्ण सूचना
प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना में किए गए नए बदलाव 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किए गए हैं। विस्तृत पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और भुगतान दरों से संबंधित दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी और लागू किए जाने हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने राज्य के संबंधित विभाग से वर्तमान प्रक्रिया की पुष्टि जरूर करें।
प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना 2026 के नए बदलाव दिव्यांग नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। 40 प्रतिशत दिव्यांगता की पात्रता और बच्चों को शामिल करने के फैसले से अधिक परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। पात्र नागरिकों को अपने दस्तावेज तैयार रखकर सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन करना चाहिए।